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अब
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अब
एक नव+विधा
तिथि-- स्थिति--
--.--.---- ई0
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प्रिन्ट वर्सन
डिजिटल वर्सन
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AB
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AB
VIDHA
DAY -- POSITION --
--.--.---- A.D.
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मैं न गद्य में न पद्य में न छंद में न द्वंद में ..कला की नई विधा अब में अपना अवतरण करता हूं ...
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अब Bhasa aur कला का नरसिंहावतार है
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'अब/AB'
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''SPECIAL''
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ईश्वर के बारे में भाषा, कला, लेखन आदि की तमाम विधा और विधा के तमाम प्रचलित रूपों में द ग्रेट गॉड का अवतरण सम्पूर्ण व्याख्या व्यक्त करने में अपूर्ण प्रतीत हो रहा था इसलिए एक नई विधा की जरूरत पड़ी । अब विद्या की विधा में एक नई विधा का जन्म है ।! आवश्यकता आविष्कार की जननी है ।। यद्यपि यह विधा भी मात्र विधा के मानकों का विस्तारवाद है तथा यह सोच और दृष्टि तथा समझ और विवेक को विस्तार दे सकता है । मगर ईश्वर की सम्पूर्ण व्याख्या नहीं कर सकता । यह क्या कोई भी ईश्वर की सम्पूर्ण व्याख्या शायद या नहीं ही कर सकता है । मगर इस नहीं में हां की गुंजाइश यह बनती है कि हम अपनी सोच वगैरह के तमाम आयाम को विस्तार देकर उसके विराट स्वरूप को समझने का प्रयास कर सकते हैं । इसलिए इसी प्रयास की दिशा में यह एक नवीन प्रयोग और आविष्कार है । यद्यपि यह कहानी और इस कहानी में खोज, प्रयोग, आविष्कार की बानगी है । क्योंकि ईश्वर की खोज में इनकी एकल या समग्र शक्ति भी ईश्वर की खोज के लिए कितनी शक्तिशाली है’ हम स्वयं समझ सकते हैं । अतः अपनी समझ को विस्तार देते हुए भाषा और कला की नई विधा अब का आनंद लिजीए !
अब क्या है ! अब एक नई विधा है: अब भाषा विधा है । अब लेखन विधा है । अब कला विधा है । अब अभिव्यक्ति की नई नवीन विधा है । यह भाषा, लेखन, कला के प्रचलित मानकों से इतर अपने नवीन अंदाज के साथ प्रस्तुति करती है ।
इसके बारे में बताने से अच्छा है, इसे स्वयं ही देखा जाए । क्योंकि जहां प्रचलित नियम बिखरेंगे वहां अपने आप नए नियम बनेंगे और इसी के साथ अब का अवतरण होता जाएगा ।।
विद्या की दुनिया में प्राचीन और नवीन के संगम से एक नई अभिव्यक्ति विधा अब का जन्म अपूर्व है ! अद्भुत है । अभूतपूर्व है !
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अब एक स्वतंत्र एक फ्रीलांस विधा है । इसका प्रथम नियम यह है कि इसमे नियम की कोई पाबंदी नहीं है । यह प्रचलित और परंपरागत प्रणाली का समर्थन करता है मगर उसके सीमित दायरे में रहकर संचालन करने के सीमित दायरे का समर्थन नहीं करता’ इसके लिए बनाम इसलिए भाषा और कला की स्वतंत्र विधा का सूत्रपात करता है । अतः इससे या इस संदर्भ में यह प्रश्न उठने का सवाल ही पैदा नहीं होता कि इसमे या इसके अवतरण में भाषा अथवा कला के स्तर पर फलां-फलां त्रुटियां हैं - क्योंकि इसमे भी लोमहर्षक बात तो यह है कि कोई भी प्रयोग आविष्कार का रूप तभी लेता है जब वह बनी-बनाई परिपाटी का उल्लंघन करता है, तोड़ता है ...। इन त्रुटियों के कारण ही तो कोई भी प्रयोग आविष्कार का रूप लेता है बनाम इसी तर्ज पर तमाम प्रचलन में चल रही विधाओं के बीच एक नई विधा के रूप में अब ने जन्म लिया है !!
अब में कई सारे तत्व और गुण हैं जो इस रचना के प्रारूप के साथ स्पष्ट होते जाएंगे । अब की नियमावली का समुचित वर्णन करने से इसके रोमांच पर असर पड़ सकता है । तथापि समझने के लिए इतना काफी है कि जहां भी भाषा अथवा कला वगैरह की किसी भी प्रचलित परिपाटी से इतर कुछ वर्णित या लिखित है अथवा किसी प्रचलित नियम वगैरह का उल्लंघन है, एवं प्रचलित शैली व अंदाज से परे कहीं भी कुछ भी हुआ है वहां अब ने अपने कदम रखे हैं व अपना अवतरण किया है !
अब भाषा और कला का संगम एवं नव अवतरण है ।।
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तिथि: तिथि का अर्थ उस तिथि से है जिस तिथि को रचना प्रकाशित हुई ।
स्थिति: स्थिति का अर्थ उस स्थिति से है कि उस तिथि तक रचना की स्थिति किस स्थिति में है तथा वह उस तिथि तक कितनी बार अपडेट और अपग्रेड हुई है ।
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TO BE CONTINUED ---
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