🌟🌟🌟🕉️🌟🌟🌟
🌟🌟🌟🕉️🌟🌟🌟
प्रश्न करना शुरु कर दिया है !
आग-सी लग गई है ..जलने को दुनिया तैयार बैठी है जलाने को हम !
🌟🌟🌟🕉️🌟🌟🌟
ज्ञानियों ने अपने थिंक टैंक से जो गोला दागा था समय के साथ वो बढ़ता जा रहा था ! वह पहले बम के गोलों में तब्दील हुआ फिर तोप के गोलों में । फिर परमाणु हाइड्रोजन वायरस बम के गोलो में । अब इसका आकार गोल पृथ्वी से बड़ा होनेवाला था । गोल पृथ्वी को गोल करने का इन्होने बंदोबस्त कर लिया था, ज्ञान के गोलचक्कर में दुनिया फंस चुकी थी । एक चूक और सब साफ कुछ भी नहीं माफ़ ! क्या बात है ?
उस वैज्ञानिक ने अपने प्रयोग की सफलता पर कहा - अब मात्र एक वार में दुनिया मिटा सकता हूँ, अहा !
🌟🌟🌟🕉️🌟🌟🌟

No comments:
Post a Comment